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बस्ती में पुलिस का अमानवीय चेहरा: 112 पीआरवी की पिटाई से युवक की मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

खाकी का 'न्याय' या जानलेवा कहर? बस्ती में पुलिस पर युवक की बेरहमी से हत्या का आरोप ​बस्ती: पुलिस बनी न्याय की देवता, बैजलपुर में युवक की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप

अजीत मिश्रा (खोजी)

खाकी का ‘न्याय’ या कानून का मखौल? बस्ती में पुलिस पर हत्या का गंभीर आरोप

  • वर्दी के अहंकार में गई एक और जान: 112 पुलिस पर गंभीर आरोप, सीसीटीवी खोल सकते हैं राज
  • क्या खाकी के लिए कानून के कोई मायने नहीं? बस्ती में युवक की मौत के बाद सवालों के घेरे में पुलिस

बस्ती: उत्तर प्रदेश पुलिस का एक और चेहरा बेनकाब हुआ है। ‘सुरक्षा और सेवा’ का दंभ भरने वाली पुलिस अब खुद ही न्याय की तराजू हाथ में लेकर फैसला सुनाने लगी है। कलवारी थाना क्षेत्र के बैजलपुर गाँव में 112 पीआरवी पुलिस पर जिस तरह का आरोप लगा है, वह खाकी के इकबाल को तार-तार करने के लिए काफी है।

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क्या पुलिस बन गई है ‘जज’ और ‘जज’ ही बन गई ‘जल्लाद’?

परिजनों का दावा है कि पुलिस ने किसी आरोपी की तरह नहीं, बल्कि किसी दुश्मन की तरह युवक पर कहर बरपाया। एक माँ का दर्द और हाथ में पकड़ी वह ईंट चीख-चीख कर उस क्रूरता की गवाही दे रही है, जिसका शिकार उनका बेटा हुआ। सूत्रों की मानें तो मामला सिर्फ नशे में बहस का था, लेकिन वर्दी के अहंकार ने इसे मौत के तांडव में बदल दिया। आरोप है कि गुस्से में सिपाही ने युवक को जमीन पर पटक दिया, जिससे उसे जानलेवा चोटें आईं।

घटना का विवरण

  • स्थान: बैजलपुर गाँव, कलवारी थाना क्षेत्र, बस्ती, उत्तर प्रदेश।
  • आरोप: परिजनों का आरोप है कि 112 पीआरवी (PRV) पुलिस द्वारा बेरहमी से पिटाई किए जाने के कारण युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।
  • परिजन का पक्ष: पीड़ित परिवार का दावा है कि पुलिस की पिटाई के कारण युवक को गंभीर चोटें आईं। वीडियो में एक महिला कथित तौर पर उस ईंट को दिखा रही है जिसका इस्तेमाल हमले में किए जाने का संदेह है।
  • सूत्रों के अनुसार: कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि युवक नशे में था और सिपाही से भिड़ गया था, जिसके बाद सिपाही ने गुस्से में युवक को जमीन पर पटक दिया, जिससे उसे चोट लगी।

सीसीटीवी में दफन है सच्चाई

इस मामले की सबसे अहम कड़ी ग्राम प्रधान के घर और पास के एक स्टोर पर लगे सीसीटीवी कैमरे हैं। परिजनों का आरोप है कि उन्हें पुलिस द्वारा पिटाई की सूचना दी गई थी, लेकिन सच क्या है—यह उन फुटेज में कैद हो सकता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन कैमरों की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर ‘पुलिस बनाम आम आदमी’ की इस जंग में वर्दी का बचाव किया जाएगा?

न्याय की मांग और जांच के बिंदु

  • सीसीटीवी फुटेज: ग्राम प्रधान के घर और पास के एक स्टोर पर लगे सीसीटीवी कैमरों से घटना की सच्चाई सामने आ सकती है, क्योंकि उनमें संभवतः एम्बुलेंस का नंबर और घटना का घटनाक्रम कैद हो सकता है।
  • पुलिस की भूमिका: परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनकी निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है।

पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

यह घटना पुलिस विभाग के लिए एक कलंक है। जब 112 पीआरवी का काम सुरक्षा प्रदान करना है, तो वे सड़क पर ‘न्याय के देवता’ बनकर पिटाई करने वाले कौन होते हैं? इलाज के दौरान युवक की मौत ने प्रशासन की संवेदनहीनता और पुलिस के बेलगाम होने पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

​क्या बस्ती पुलिस इस घटना की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करेगी? या फिर मामला ‘लीपा-पोती’ की भेंट चढ़ जाएगा? जनता जवाब चाहती है, और न्याय का इंतजार सिर्फ पीड़ित परिवार को नहीं, बल्कि पूरे बस्ती को है।

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